उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती का कार्यक्रम बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया

आज दिनांक 31 जुलाई 2018 दिन मंगलवार को
सूरजभान सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज शिकारपुर बुलंदशहर में महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती का कार्यक्रम मनाया गया

शिकारपुर बुलंदशहर के शिकारपुर स्थित सूरजभान सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज शिकारपुर बुलंदशहर में श्रेष्ठ उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती का कार्यक्रम बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया इस कार्यक्रम का आरंभ हो विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता जी ने मां शारदे व मुंशी प्रेमचंद जी के समक्ष दीप प्रज्वलन व पुष्पार्चन कर किया कार्यक्रम का संचालन सामाजिक विभाग की आचार्य श्री बृजेश कुमार तिवारी जी ने किया तथा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विज्ञान विभाग के आचार्य श्री केशव कुमार जी रहे और मुंशी प्रेमचंद के जीवन वृतांत पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपने मुखारविंद से उनके जीवन पर प्रकाश डाला तथा उनके कठिन परिश्रम और लगन से छात्रों ने उनके व्यक्तित्व को जीवन में उतारने की प्रेरणा भी ली कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री केशव कुमार जी ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद का जन्म स्थान 18 से 80 ईसवी को वाराणसी जिले के लमही ग्राम में हुआ था और उनकी माता का नाम आनंदी देवी तथा पिता का नाम अजायब राय था और इनके बचपन का नाम धनपतराय था किंतु यह अपनी कहानियां उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखते थे और हिंदी में प्रेमचंद के नाम से गरीब परिवार में जन्म लेने के उपरांत उन्होंने अल्प आयु में ही माता-पिता का सुख प्राप्त नहीं किया वह सुख से वंचित होने के कारण भी साहस और परिश्रम से हिंदी साहित्य की सेवा में संलग्न रहे तथा इन्होंने हिंदी जगत में अपना अमूल्य जीवन देकर के अनेक पत्र पत्रिकाओं का संपादन किया जिसमें मर्यादा माधुरी हंस एवं जागरण पत्र का संपादन किया और उन्होंने अपने जीवन में प्रसिद्ध उपन्यास सेवासदन निर्मला रंगभूमि गबन गोदान कर्बला संग्राम रूठी रानी और प्रेम की वेदी इनकी मुख्य कृतियां हैं जीवन भर संघर्षों से जूझकर सारा जीवन साहित्य की सेवा में प्रदान करते हुए अपने जीवन में विभिन्न उपन्यास व अन्य निबंध हिंदी साहित्य को प्रदान किए जिनमें गोदान हिंदी का एक सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है तथा उन्होंने अपने जीवन में विभिन्न उपन्यास निबंधों की रचना करते हुए अनेक कहानी को भी लिखा तथा यह एक उर्दू संस्कृत और हिंदी के विशेष प्रेरणादायक गद्यकार कहे जाते हैं और इनकी विभिन्न शैलियों से ज्ञात होता है कि उन्होंने अपने जीवन में विभिन्न प्रकार की शायरियां जैसे वर्णनात्मक विवेचनात्मक मनोविज्ञान हास्य व्यंग्य प्रधान भावात्मक शैलियां द्वारा अनेक मर्मस्पर्शी कहानी को रचा क अंत में उन्होंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य की सेवा करते हुए सन 1936 ईस्वी में यह सरस्वती मां का सपूत इस भौतिक संसार से सदैव के लिए विदा हो गया तथा उन्होंने बताया कि ऐसे महान व्यक्तित्व से हमें अपने जीवन में कुछ सीख लेनी चाहिए जिससे हमारे जीवन का व्यक्तित्व ही एक उच्च शिखर पर पहुंच सके और हम समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण कर सकें अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता जी ने बताया कि ऐसे व्यक्तित्व से हमारे व्यक्तित्व को अमूल्य निधि प्राप्त होती है हम प्रत्येक जयंतियां से विभिन्न प्रकार की सीख को अपने जीवन में धारण करें जिससे हमारा जीवन भी एक समाज हित में सर्वोपरि बन सके
अवसर पर विद्यालय के आचार्य श्री गजेंद्र सिंह मीणा जी कैलाश चंद चौबे गजेंद्र सिंह जी श्री सोनू कुमार श्री शिवकुमार जी श्री नरेंद्र सिंह निराला हरकेश कुमार मीणा श्री ललित पाठक जी आदि समस्त स्टाफ उपस्थित रहा

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